World’s First NUCLEAR☢️ Bomb Attack on Hiroshima, JAPAN | Full Story Before & After Scene | Hindi

सोचो एक ऐसा दिन जब आसमान से मौत बरसने लगे 6 अगस्त 1945 की सुबह जापान के हिरोशिमा शहर में ठीक ऐसा ही हुआ सुबह 8:1 पर अमेरिकी सेना ने जापान के हिरोशिमा शहर पर एक खास तरह के विमान b29 सुपर फटे से लिटिल बॉय नाम का परमाणु बम गिराया इस बम की ताकत 15 किलो टी एनटी के बराबर थी जो बहुत ज्यादा होती है यह मानव इतिहास का पहला परमाणु बम हमला था जैसे ही बम गिरा आसमान में एक तेज चमक हुई और कुछ कुछ ही सेकंड में पूरा शहर आग के गोले में तब्दील हो गया धमाके से 80000 से ज्यादा लोग तुरंत मारे गए और हजारों की संख्या में लोग घायल हो गए यह बम हिरोशिमा के ऊपर करीब 500 मीटर की ऊंचाई पर फड़ गया इस धमाके की ताकत इतनी ज्यादा थी कि 13 वर्ग किलोमीटर का एरिया पूरी तरीके से खत्म हो गया बम के बाद आसमान में एक बहुत बड़े मशरूम के आकार का बादल उठा जो करीब 12 से 15 किमी ऊंचा था हिरोशिमा पर हमले से पहले जापान का एक बहुत ही खूबसूरत शहर था यहां की सड़कें इमारतें सब कुछ बहुत ज्यादा खूबसूरत थी विदेशों से भी यहां पर लोग पढ़ने आते थे शहर के लोग अपनी जिंदगी खुशी-खुशी जी रहे थे लेकिन परमाणु बम के एक हमले के बाद हिरोशिमा का नक्शा ही बदल गया बिल्डिंग मिट्टी में मिल गई सड़क उखड़ गई और और हर तरफ सिर्फ लाशें ही लाशें दिखाई दे रही थी धमाके के बाद का नजारा बहुत ही ज्यादा भयानक था चारों तरफ सिर्फ तबाही तबाही थी आग के लपटे आसमान छू रही थी और रेडिएशन से लोग बुरी तरह प्रभावित थे हिरोशिमा का तापमान बहुत ही ज्यादा बढ़ गया था धमाके के केंद्र में तो तापमान 4000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था कई लोगों की परछाइयां दीवारों पर छप गई जो आज भी देखी जा सकती हैं इस हमले में लाखों लोग मारे गए या फिर बुरी तरीके से जख्मी हुए जो लोग बच गए वो रेडिएशन की वजह से होने वाली बीमारियों से जूझने लगे परमाणु बम के हमले के बाद रेडिएशन के कनों से भरी हुई काली बारिश हुई थी बम फटने से जो मलबा और धूल उठी उसमें रेडियोएक्टिव पदार्थ भी शामिल थे ये पदार्थ बादलों के साथ मिल गए और फिर काली बारिश के रूप में जमीन पर बरसने लगे इस बारिश ने अपने संपर्क में आने वाली हर चीज को दूषित कर दिया और जो लोग इस बारिश के पानी के संपर्क में आए उन्हें कई तरह की बीमारियां हुई कई लोगों की तो मौत भी हो गई ये बारिश हिरोशिमा के लिए एक बहुत बड़ी तस्ती बनी सो गाइ ये है हाइपो सेंटर मतलब एगजैक्टली यहां से 600 मीटर ऊपर एटॉमिक बम फटा था एग्जैक्ट ये देखो शहर के बीचोंबीच है आप देख रहे हो ना एरिया और यह जो फोटो आप देख रहे हो ना ये यूएस आर्मी ने ली थी खुद ने फोटोग्राफ बाय यूएस आर्मी नवंबर 1945 में और आज भी लोग यहां पर आते हैं और यह मेमोरियल बनाया हुआ है भाई ये जो बिल्डिंग आप सामने देख रहे हो ना इसका नाम है हिरोशिमा परफेक्टर कमर्शल एग्जिबिशन और ये 1915 में बनकर तैयार हुई थी और यह बहुत ही ज्यादा फेमस बिल्डिंगों में से थी हिरोशिमा की यहां पर काफी ज्यादा एग्जिबिशन लगते थे और मतलब एक जैसे कहते हैं ना लैंडमार्क होता है किसी भी शहर का ये बिल्डिंग उनमें से एक थी जो सबसे खूब खूबसूरत बिल्डिंग थी सबसे फेमस बिल्डिंग थी अपनी एक एग्जिबिशन हॉल था वो आज बदल चुका है एटम बॉम डोम में वैसे 1996 में इसको मतलब ये डिसाइड हुआ पहले तो ये ंडर के तौर पे ही पड़ी थी बट यहां के लोगों ने फिर डिसाइड किया कि यार हमें कुछ तो ऐसा ही शहर में रखना चाहिए जो हमारी फ्यूचर जनरेशन को दुनिया को याद दिलाता रहे कि हुआ क्या था वरना तो इसको तोड़ के भी पूरा जो ऐसे आप देख रहे हो ना पूरा जैसे शहर बना दिया है इसको बना सकते थे बट अमेरिकन इसने जापान ने यही डिसाइड किया कि भाई इसको रखेंगे आप देख रहे हो जो हीट थी पूरा लोहे का जो पूरा ढांचा है सब पिकल गया था अकेली ये बिल्डिंग थी कि जिसका जो बाहरी दीवार है वो बची हुई थी अंदर की दीवारें सारी इसकी भी टूट गई थी और जितने लोग थे वो सब मारे गए थे और मैं अभी आपको दिखाऊंगा कि यहां के आसपास का क्या हाल हुआ था ये देखो ये जो बिल्डिंग है जो मैं आपको ए टोम दिखा रहा हूं ये है और पूरा शहर मिट्टी हो चुका है पूरा शहर सिर्फ बिल्डिंगों के ढांचे बचे हुए हैं वो भी कुछ ही बिल्डिंगों के ये हाल था उस दिन और ये जो फोटो देख रहे हो ना ये भी अक्टूबर में ली गई थी 6 अगस्त 1945 को हमला हुआ और इतना रेडिएशन यहां पर हो गया था कि भाई ये जो फोटो आप देख रहे हो ये अक्टूबर में ली गई वैसे कुछ लोगों ने हिम्मत की थी यहां पर कि भाई फोटो ली जाए उस दिन की भी फोटोज मैं आपको दिखाऊंगा जो उस दिन अटैक हुआ उसी दिन की फोटो कैसी थी कैसे फोटोग्राफ्स ने या जो रिपोर्टर्स थे उन्होंने अपनी जान दे दी ताकि याद रहे कि हुआ क्या था तो अब चलते हैं अंदर से शुरू करते हैं पहले दिखाऊंगा उस दिन अटैक होने से पहले एक मिनट क्या माहौल था कैसे अटैक हुआ और कैसे चीजें बदलती चली गई और फिर उसके बाद बताएंगे कि भाई कैसे प्लानिंग हुई क्या वाकई में इसकी जरूरत थी य एक पावर का शो था ये अमेरिका की तरफ से सारे सीन बताएंगे चलो अब सो गाइस 2896 3 दिन हो चुके हैं दुनिया का सबसे पहला न्यूक्लियर बम अटैक हुए हुए और जो दिन हो चुके हैं न्यूक्लियर बम के टेस्ट को वो है 192 दिन तो भाई कुछ ऐसा दिखता था हिरोशिमा जब उसपे न्यूक्लियर बम का अटैक नहीं हुआ था इस तरह की बसावट थी इस तरह की बिल्डिंग्स थी इस तरह की रिहायशी इलाके थे यहां पर पूरा मतलब एक तरीके से कहते हैं ना फला फूल हुआ शहर था प्रोस्पेस शहर था मैं आपको बता दूं जो हिरोशिमा था वो पूरी दुनिया में फेमस था कि यहां पर लोग पढ़ने आते थे उस टाइम में भी अमेरिका से चाइना से लोग पढ़ने आते थे क्योंकि यहां की जो यूनिवर्सिटीज थी वो काफी फेमस थी 1945 की फोटो है जब ट्राम्स चल रही है रोड पे आप देख रहे हो तो इससे एक तरी आपको एक आईडिया हो जाएगा कि जो तबाही आई थी वो कैसी तबाही आई थी क्योंकि जब आप वो पिक्चर देखोगे ना तबाही के बाद की तो आपको शायद बिलीव नहीं होगा कि ये वो शहर था ट्रैंप्स देखो 1945 में जो हिरोशिमा में चलती थी पब्लिक ट्र ट्रांसपोर्ट के तौर पे ये एक बच्चों की फोटो है जो हंसते हुए स्माइल है वो दिखाई जा रही है कि भाई इस तरीके से फलता फूलता शहर था लोग ुस ते बच्चे थे खूबसूरत बच्चे थे यहां पर सो ये जो आप घड़ी मेरे पीछे देख रहे हो ना एग्जैक्ट 8:1 पे रुक गई है 6 अगस्त 1945 जब एटॉमिक बॉम्ब का हमला हुआ आपने जो अभी शहर देखा उसका क्या हाल हुआ मैं आपको दिखाता हूं एग्जैक्ट 600 मीटर ऊपर हिरोशिमा से जब वो बम फटा तो जो फलता फूलता शहर था ना उसका यह हाल हो गया ये जो पिक्चर आप देख रहे हो ये खुद अमेरिका ने दो-तीन महीने बाद ली थी जब उन्होंने अटैक किया और यह हाल था हिरोशिमा का उस बॉम अटैक के बाद जितनी भी मार्केट आपने देखी जितने भी हंसते हुए बच्चे देखे हैं उनके स्कूल्स हो मार्केट हो रिहायशी इलाके हो सब मिट्टी में धूल में मिल गई और ये फोटो दे देख रहे हो ना पूरे शहर की एक पैनोरमिक फोटो है जो खुद अमेरिका ने ही ली थी यह है हिरोशिमा की एक इमेज एक रिप्रेजेंटेशन की बॉम गिरने से पहले वह कैसा दिखता था कितना ज्यादा एक तरीके से कहते फल फूलता हुआ शहर था और अब एग्जैक्ट 6 अगस्त 1945 की वो मंजर दिखाएंगे जब यहां पर एटम बम गिरा तो यह देखो यह हिरोशिमा बम से पहले और अब वो टाइम और यह आप देखोगे न्यूक्लियर बम जाता हुआ हिरोशिमा की तरफ एजेक्ट 815 [संगीत] पर और कुछ इस तरीके से पूरा शहर तबाह हो गया ये देखो पूरा आग का एक बहुत बड़ा गुब्बारा जिसे कहते हैं ना बहुत बड़ा पूरे शहर पर कवर कर गया अब आपने यह देखा कि उस दिन हुआ कैसे था कैसे बम गिरा शहर पे अब मैं दिखाता हूं इस मंजर के बाद क्या हुआ शहर में भाई यह जो है ना यह वाली और यह वाली पहली फोटो है जो उस दिन ली गई थी और इकलौती दो फोटो हैं जिस दिन अटैक हुआ था ली गई थी तकरीबन तीन घंटे बाद जब अटैक हुआ तो यहां पर एक फोटोग्राफर थे पहले तो 20 मिनट तक भाई वो फोटो ही नहीं ले पा रहा था इतना हिच किचा रहा था मतलब ऐसी हालत थी जो वो अपनी आंखों से मंजर देख रहा था ना कि लोगों की खाल लटकी हुई है लोग जले हुए हैं ये देखो भाई पूरे लोग मतलब राख हुए हुए हैं ये एग्जैक्ट 2250 2700 मीटर के दूर था जहां बम फटा था 2700 मीटर दूर और वहां पर लोगों के ये हालात थे कितने लोग अपनी जान गवा बैठे थे मतलब लाशें पड़ी हुई थी और लोग एक दूसरे की हेल्प भी करने की कोशिश कर रहे थे ताकि जो आग लगी है जो उनकी खाले जल गई है उससे थोड़ी सी राहत मिल जाए और इस फोटो में अगर आप देखोगे तो एक पुलिस वाला मतलब पहला फर्स्ट एड जो शुरू हुआ था ये टोपी में देख रहे हो एक पुलिस वाले थे और ये एक होम कुकिंग ऑयल जो घर में तेल इस्तेमाल होता है ना वो सप्लाई कर रहे थे लोगों को ताकि वो अपनी खाल पे लगा सके और ये इकलौती दो फोटो हैं जो उस दिन ली गई उसके बाद कोई फोटो नहीं ली गई जब ये फोटो ले रहा था ना फोटोग्राफर तो उस टाइम भी बेचारा रो रहा था साथ ही साथ उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे हेजिन थी कि क्या देख रहा हूं उसको भी खुद भरोसा नहीं हो रहा था क्या देख रहा है ये जो आप फोटो देख रहे हो ना धुए की ये सबसे क्लोजेस्ट फोटो है जब वो बम फटा तो इस तरीके का कुछ धुए का जो वो था ना वो बारा वो पूरे शहर में देखा गया ये जो फोटो है ये 6500 मीटर दूर से ली गई है एक 17 साल का बच्चा था जो किसी फैक्ट्री में काम करता था उस टाइम उसने ये फोटो ली है ये जो आप कपड़े देख रहे हो ना ये सभी बच्चों के कपड़े थे और स्पेशली जो ये वाले हैं ना ये थे इस बच्चे के जिसका नाम है तसो किता बाशी ये 12 साल का बच्चा था और और ये भी वहीं काम कर रहा था जहां पर बम फटा जब ये अपने घर पहुंचा पूरा पूरा जला हुआ था पूरा फेस स्लन था इसका इसके घर वालों ने इसको कोशिश की अपने बच्चे को बचाने की बट अगले ही दिन इसकी डेथ हो गई इसके पापा का जो इंटरव्यू था उसमें उन्होंने बोला कि हम पूरी रात बैठे रहे पूरे दिन लगे रहे कि हम किस तरीके से अपने बच्चे को बचा ले बट ऐसा नहीं हो पाया और जहां पर बम फटा था ये जितने भी कपड़े आप देख रहे हो ना ये सब बच्चे वहां पर खेल रहे थे कोई काम कर रहा था वैसे उस शहर में डिमोलिशन वर्क चल रहा था कुछ बिल्डिंग टूट रही थी तो उस टाइम में छोटे-छोटे बच्चे भी जाते थे काम करने और ये जो सारे बच्चे हैं ये उस दिन उस एटम बम के अटैक में मारे गए और कहा जाता है कि हजारों बच्चे थे जो उस दिन वहां पर थे खेल रहे थे स्कूल जा रहे थे जिनकी डेथ हो गई और ये उनमें से कुछ की फोटो आप देख रहे हो हिरोशिमा पर परमाणु बम हमले में मारे गए लोगों की कहानियां और भी दर्दनाक है शशि को एक 9 साल की बच्ची थी जो हमले के दिन अपने घर के आसपास खेल रही थी अचानक एक तेज रोशनी हुई और शची को कुछ समझ पाती इससे पहले कि वोह बेहोश हो गई जब उसे होश आया तो अपने घर से बहुत दूर थी और उसके शरीर पर गंभीर जलन हो रही थी शशि को के माता-पिता हमले में मारे गए और वह अकेली रह गई आने वाले महीनों में बीमारियां और चोटों की वजह से और भी लोगों की मौत हुई कुल मिलाकर अनुमान है कि हमले में लगभग 140000 लोगों ने अपनी जान गवा दी आज भी हिरोशिमा में उस हमले के निशान देखे जा सकते हैं यह हमें याद दिलाता है कि परमाणु हथियार कितने खतरनाक हैं और इन्हें कभी भी इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए इस तरीके से लोग रोड पर भाग रहे थे य काफी ज्यादा मतलब पिक्चर ऐसे दिखाया कि आपको थोड़ा बहुत समझ में आ जाए जो रियलिटी थी वो तो आप देख भी नहीं सकते इसलिए व पिक्चर नहीं लगाई गई है [संगीत] ये जो आप देख रहे हो ना ये बॉडीज थी जो डेड बॉडीज थी उनके जो कलर थे वो बदल गए थे कुछ ग्रीन हो गए थे कुछ रेड हो गए थे कुछ पर्पल हो गए थे मतलब इतना ज्यादा रेडिएशन इतना ज्यादा जहर फैल गया था पूरी हवा में यह जो फोटो आप देख रहे हो ये ट्रैम है जो ट्रैम चलती है ना एस पब्लिक ट्रांसपोर्ट उसके अंदर पूरी बॉडी जो थी वो कोयला बन गई थी जिसे कहते हैं ना इंसानी कोयला यह जो फोटो आप देख रहे हो ना यह सा से 9 अगस्त के बीच में ली गई है मतलब फोटो बनाई गई है क्योंकि अगर फोटो तो आप देख ही नहीं सकते इतनी ज्यादा हार्ड हो जाएगी देखना ये जो आप काला निशान देख रहे हो ना यह पत्थर पे कोई आम निशान नहीं है यह जो पूरा स्ट्रक्चर आप देख रहे हो ये बैंक था और बैंक की स्टेयर्स मतलब बैंक के बाहर कोई बंदा बैठा था वेट कर रहा था कि बैंक खुलेगा तो मैं अंदर जाऊंगा जब बम फटा तो उसकी जो पूरी बॉडी की परछाई है ना वो इस पर छपी रह गई पूरी बॉडी मतलब यहीं के यहीं राख हो गई और जो उसकी पूरी बॉडी की परछाई थी वो इन पत्थरों प पे आज तक भी है आप देखो ये दिखाया गया है इस तरीके से इतना डार्क स्पॉट था जो उस बैंक की पूरी स्टेयर्स पे आ गया था अभी ये म्यूजियम में इसको काट के ले आए हैं ताकि याद रहे कि भाई एक एटम बम क्या कर सकता है ये लिखा है इसके बारे में आप इसे पोज करके पढ़ सकते हो जैसे ही बम का अटैक हुआ ना उसके कुछ घंटों बाद जितनी भी धूल थी जितनी भी रेडियोएक्टिव तत्व थे वो एकदम भाप बन गए भाप बन गए और काले काले बादल हो गए पूरे शहर की तरफ अब वो काले बादल जो थे वो वाटर वेपर्स के साथ मिले बादल में जाके और वहां से बारिश होनी शुरू हो गई और जो बारिश थी ना उसका जो कलर था वो बिल्कुल ब्लैक था बिल्कुल ब्लैक तो लोग जैसे ही बारिश होने लगी जो जले हुए लोग थे उन्होंने अपने मुंह खोल दिए क्योंकि वो चाह रहे थे कि यार जो गला सूख रहा है उनको उनका जलन हो रही थी बॉडी में कि उन्हें पानी मिल जाए बट लोग पानी नहीं पिला रहे थे क्योंकि जले हुए को पानी नहीं पिलाते आप देख सकते हो कि कैसी बारिश रही होगी ये जो कपड़े हैं ना आप देख रहे हो इस कपड़े पे जो निशान है आप काले काले ये बिल्कुल असली उसी बारिश के निशान जब बम का अटैक हुआ तो जो हॉस्पिटल था हिरोशिमा का वो पूरा तबाह हो गया तो भाई अब हॉस्पिटल नहीं है तो रिलीफ कैसे चलेगी तो इस तरीके के कुछ रिलीफ कैंप थे जो इमरजेंसी में बनाए गए जिन पर कोई फैसिलिटी नहीं थी कोई मशीन नहीं थी कोई दवाई नहीं थी क्योंकि जो मेन हॉस्पिटल था वो तो खत्म हो चुका था तो नदी के किनारे कुछ इस तरीके के टेंट लगाए गए जो आप देख रहे हो और इस तरीके का वहां पे माहौल था आप देखो कितने लोग जले हुए लेटे हुए हैं जो लोग ठीक थे वो मदद करने की कोशिश कर रहे हैं पूरी पूरी बॉडी में बर्न्स है ये देखो पूरी पूरी बॉडी में बर्न्स है यहां पर ये उस एग्जैक्ट जो इमरजेंसी कैंप था उसकी इमेज उसकी फोटो देख रहे हो आप कि भाई यहां पर कैसे इमरजेंसी कैंप चलाया था कैसे लोगों ने एक दूसरे की मदद करने की कोशिश की थी और ये जो वीडियो देख रहे हो यह भी एग्जैक्ट वहां की असली वीडियो है ये देखो यह जो आप हुक देख रहे हो ना ये जो स्ट्रेचर देख रहे हो ये वही हुक है जिससे बॉडी निकाली गई थी उस नदी से जो मैं आपको दिखा रहा था जो पूरी नदी बॉडी से भर गई थी तो इस तरीके के कुछ हुक बनाए गए थे और इस तरीके का स्ट्रेचर था आज भी आप इस स्ट्रेचर प देखो जो खून के निशान है जो उस टाइम के निशान है वो आज भी ऐसे के ऐसे ही है जब ब्लैक बारिश हुई थी तो ये दोनों बच्चे उस ब्लैक बारिश में आ गए थे अब देखो इन दोनों के बाल चले गए उस ब्लैक बारिश से हुआ क्या कि जैसे ही ब्लैक बारिश इनके ऊपर पड़ी चार से पाच दिन के बाद इन दोनों के बाल झड़ने लगे पर इनकी जान बच गई बट 4 साल बाद इस बच्चे की डेथ हो गई और इस लड़की की 20 साल बाद डेथ हो गई जब साल की थी वो भी कैंसर से ये सारी फोटो उन लोगों की उस दिन जान तो बच गई ब बाद में इलाज करते हुए हमने घर पर डेथ हो गई हिरोशिमा पर गिरा गया परमाणु बम लिटिल बॉय 15 किलो टी एनटी के बराबर था लेकिन हैरानी की बात यह है कि यह बम पूरी तरीके से कभी फटा ही नहीं अगर यह पूरी तरीके से फट जाता तो तबाही और भी ज्यादा होती इसमें यूरेनियम का एक खास प्रकार था जिसे यूरेनियम 235 कहते हैं इस बम में करीब 64 किग्रा यूरेनियम 235 था लेकिन इसमें से सिर्फ 1.5 कग्र यूरेनियम ही पूरी तरीके से फट पाया यही वजह है कि हम सोच भी नहीं सकते अगर ये बम पूरी तरीके से फट गया होता तो क्या होता तो भाई टोटल 17 टारगेट थे जो अमेरिका ने डिसाइड किए थे कि इन टारगेट्स पे हम एटम बॉम छोड़ेंगे जापान में क्योंकि इनको यह देखना था कि सबसे ज्यादा नुकसान कहां पर हो सकता है जहां पर इन्होंने डिसाइड कर रखे थे कि यहां पर एटम बम फेंकना है तो वहां पर जो है ना इन्होंने एयर स्ट्राइक बिल्कुल बंद कर दी थी तो 17 पूरी टोटल लिस्ट में से इन्होंने 2 तारीख को फाइनल किया कि जो हम बॉम गिराने वाले हैं वह गिराने वाले हैं हिरोशिमा पर और 6 अगस्त सुबह 8:1 पे हिरोशिमा पे बम गिरा दिया हिरोशिमा इन्होंने मेन टारगेट चुना क्योंकि जो इनके आंकड़े थे उसके हिसाब से सबसे ज्यादा सही हिरोशिमा बैठ रहा था भाई आप एटम बम की तबाही देख के ही हिल गए होंगे बट आप हिल जाओगे ये जान के कि एग्जैक्ट ये सारा कारनामा करने के बाद 4 साल के बाद अमेरिका ने हाइड्रोजन बम भी टेस्ट कर दिया और वो इतना खतरनाक था कि ये मानो कि चलो जो ये एटम बम यहां पर हिरोशिमा फेंका था इससे 625 गुना ज्यादा स्ट्रांग और हाइड्रोजन बॉम इस डर में कि यार जो है ना यूएसएसआर वो भी बना लेगा इसलिए हमने बनाया और उसका टेस्ट भी कर लिया वो इतना खतरनाक था कि उससे 185 किमी दूर मार्शल आइलैंड था जहां पर टेस्ट हुआ था वहां के जो बच्चे थे वहां के लोगों थे उन पे इतना ज्यादा साइड इफेक्ट हुआ कि उनकी बॉडी में म्यूटेशन होने लगे वो बीमार पड़ने लगे वहां पर लोग मरने लगे सिर्फ एक टेस्ट से जो 185 किमी दूर मार्शल आइलैंड था मतलब हिरोशिमा में जो बम गिरा था वहां पे 45 किलोमीटर के अंदर कुछ नहीं बचा था ये सोचो कितना खतरनाक हुआ कि 185 किमी दूर जो आइलैंड था वहां पर भी लोग बीमार होने लगे भाई ये जो मैं छू रहा हूं ना एटम बम की टाइल है मतलब जो उसका कवरिंग थी ना उसके अंदर उसकी जो फटा है यह देखो छू के ही अजीब सा लग रहा है भाई ऐसा इसमें रेडीशन ना हो बस हेलो हेलो हेलो हेलो हे देखो भाई कि खुश हो गए हेलो हेलो हेलो हेलो हेलो तो ये बच्चे हैं भाई यहां पर स्कूल के बच्चे भी आते हैं जो जापान के स्कूल के बच्चे हैं वो यहां पर आते हैं उनको ये लोग सिखाते हैं कि भाई कैसे हुआ था क्या हिस्ट्री है बट एक प्रोफेसर साहब से मैं मिला उनका कहना था कि ये उतना नहीं बताते जितना इन्हें बताना चाहिए सिर्फ ऊपर ऊपर की बातें बताते हैं मैक्सिमम बच्चों को जापान में ये भी नहीं पता कि यार हमारे साथ हुआ क्या था और किस देश ने हम पे अटैक किया था मैं हिरोशिमा में एक प्रोफेसर से ही मिला जो यहां के पहले म्यूजियम में लोगों को इस बम अटैक के बारे में समझाते थे बट इन्होंने बाद में वहां से नौकरी छोड़ दी है कहकर कि जो पूरे तथ्य हैं और जो पूरी सच्चाई है वो जापान की सरकार लोगों को या टूरिस्ट को नहीं बता उनका कहना है कि सरकार नहीं चाहती कि लोग जाने कि कितना खतरनाक और कितने बुरे साइड इफेक्ट्स लोगों ने झेले बट आज ये प्रोफेसर उस म्यूजियम के सामने खड़े होकर लोगों को सच्चाई बताते हैं और लोगों से बात करते हैं और कुछ ऐसे डॉक्यूमेंट शेयर करते हैं जो म्यूजियम में आपको देखने को नहीं मिलते हैं अब मैं आपको सुनवा हूं मैं उनकी बात सो न दे रिमूव फम एशन आई आस्क द फोर क्यूरेटर वई यू हाड यू वा यू रिमूव दे सेड व्ट आवर मयम शुड डू इ नॉ टू टेल यू ल द फैक्टस बट नॉ टू स्केर य ओ नली द फैक्टस इ ि आई टीच सनि फर ल टाइम फ इ इन जूनर हाई स्कूल हिस्टरी बुक लवर जपान ओली टू लाइ अबाउट व्ट हैपन न ू प टू लाइ सो जपम नं मन जापनी हि इंक्लूडिंग ट पप बा कोना ो सम यंग डों नो च कंट्री ड नो पॉबल फ पी ल अमाउंट ऑ नॉलेज अब हिस्ट व आफ्टर सो ड इन ब जपन लीर डिसीव अस बाय टेलिंग अस वी सु बी यूएस एंड विन द व द सेम जर्मन हि वासी एंड दे टेलिंग अस यू फाइट टू द लास्ट किल योरसेल्फ बफर बी कैप फर द एंपरर आर जपा स ओली सेवन ऑफ द रिस्प ड एक्टेड हैं टूस बेस्ड ऑन द जमेंट ऑफ ल ट्रा बट दे दे रिस्प इपज एंड वन जपान बम इंडिपेंडेंट दे रिली एंड मेनी ऑफ देम बम पॉलि अगे इव नाउ मेनी ऑफ द फॉर्मर पॉलिटिन स ग्रा र पोलि सो प इ ओ वन फ देम न अब बाम ब मयम नेवर स्टे द नूला जपान बली मोस्ट ली अमेरिकन सोल्जर्स स् एंड अमे मि बे प्रोटेक्ट जापन लाइ इ न दे पम बा य जपान द बेस्ट फट अगस्ट चाइना रया फ्रॉम द जियोपोलिटिकल पॉइंट ऑफ व्यू दिस इज द रीजन दे डोंट वांट दे यू टू टेल दिस अबाउट द बम बिकॉज दे वांट मिलिट्री फ्रॉम द यूएस नो प्रेशर फम नो प्रेशर दे यूएस इ गिविंग सच यस इ गिविंग ओके सो इ आ स् आ ज गमें मयम इ एक्सेसिव हस्प ये कह रहे भाई इंडियन पीपल को पता होना चाहिए और इ द जज ऑफ इंडिया राइट द फर्स्ट क मैसेज फ्रॉम हिरोशिमा स चल ओके राधा विनोद पाल एक जज थे इंडिया के उनकी स्टैचू है आज भी हिज स्टैचू इज इन टोक्यो राइट कतो एंड इ टक कतो एंड टोक्यो में और ये प्रोफेसर थे म्यूजियम में पहले पहले स्कूल में पढ़ाते थे और फिर म्यूजियम के गाइड भी रहे हैं बट इन्होंने कुछ ऐसे फैक्ट्स मांगे यहां की सरकार से कि ये क्यों नहीं बताते हो तो इनको नौकरी छोड़नी पड़ी क्योंकि वहां पर ये जो फैक्ट्स इन लोगों ने यहां पे लगाए हुए हैं ना ये बताने नहीं दे रहे तो ये बता रहे हैं कि इंडिया के एक जज हुए थे जिनका नाम था राधा विनोद पाल और ये एक ऐसे जज थे जिन्होंने खुला क्रिटिसाइज किया था यूएस को उस टाइम पे लोग डर रहे थे इन्होंने बोला था कि भाई तुम जपनीज को बोल रहे हो कि जैपनीज की वजह से बम गिराया बम जैपनीज ने थोड़ी गिराया था यूएस ने गिराया था तो आज भी जिनके हाथ गंदे हैं ना खून से उनको माफी मांगनी चाहिए तो उस टाइम जब इन्होंने ये बात बोली ना तो जैपनीज इनके साथ हो गए थे बहुत ज्यादा ये बोल रहे हैं कि भाई जैपनीज जो है ना कि ओवर हेल्पफुल होते हैं ओवर वेलकमिंग होते हैं आज भी जो है ना 2 % लोग हैं जो सरवाइवर हैं उनको थोड़ा सा भी गम है कि यूएस ने क्या किया है जो 78 पर सरवाइवर्स थे ना उनको लगता है कि कोई जरूरत ही नहीं है यार माफी वाफी मांगने की जो हो गया सो हो गया तो इनका जो यहां पर खड़े हुए हैं प्रोफेसर साहब इनका कहना है कि यार हमें ना फैक्ट जानने चाहिए फैक्टस छुपाए जा रहे हैं आप म्यूजियम में जाते हो तो कहते हैं कि जो जपनीज गवर्नमेंट है वो ये बात बोलती है कि हमें ना लोगों को डराना नहीं है सिर्फ बताना है कि क्या हुआ था तो ये यहां पर अब डेली आते हैं और भाई अपना काम करते हैं साइकिल लेके आते हैं और उसपे ना फैक्ट्स लेके आते हैं तो इनकी बुक है जिसम इन्होंने पूरे फैक्ट्स है थैंक यू सर थैंक यू थैंक यू सो मच भाई अब एक सवाल मेरा आप लोगों से जो ये वीडियो देख रहे हो मतलब मैं भी उनमें से था जो बोलते थे यार हम भी एक न्यूक्लियर कंट्री है अगर हमसे कोई पंगा लेगा तो हम भी न्यूक्लियर बम छोड़ सकते हैं आपने ये जो देखा इस वीडियो में आप इस बात का जवाब दो क्या आप किसी से इतनी नफरत कर सकते हो जिंदगी में कि आप उस देश का यह हाल करो चाहे वो कितना ही कैसा ही देश हो क्या आप किसी से इतनी नफरत कर सकते हो कि वहां के लोगों को आप इस न्यूक्लियर बम से अटैक करो यह सिर्फ मारता नहीं है बर्बाद कर देता है तबाह कर देता है और जो लोग जिंदा रहते हैं ना वो भी जिंदा रहने लायक नहीं बचते हैं आज जो है पूरे 7 नाइन इयर्स के आसपास हो चुके हैं हिरोशिमा में वो बम अटैक को और आज सिटी ने अपने आप को रिबिल्ड कर लिया है और सच बताऊं तो एक देखो ऐसा रिबिल्ड किया है कि शायद काफी कंट्रीज जिनके शहर हजारों हजारों साल पुराने हैं वो भी ऐसे नहीं हैं और इस शहर से हमें बहुत कुछ सीखना चाहिए कि भाई इतना सारा जीरो होने के बाद मिट्टी मिल जाने के बाद भी दोबारा से शुरुआत की जा सकती है और ऐसे बेहतरीन शहर बनाए जा सकते हैं तो भाई हिरोशिमा से मैं करूंगा इस ब्लॉग का एंड आपका क्या व्यू है इस टोटल सिनेरियो के बारे में कमेंट करके बताना टिल देन टेक केयर थैंक यू एंड बाय बाय गाइस

Disclaimer-
This video aims to educate viewers about the Hiroshima nuclear bombing — including the events before, during, and after the attack. The content may include historical facts, survivor accounts, and visuals that some viewers may find disturbing. Our intention is not to hurt anyone’s sentiments, but to share an important chapter of world history so we can learn from the past. Viewer discretion is advised.

डिस्क्लेमर:
यह वीडियो हिरोशिमा पर परमाणु बम हमले की जानकारी देने के उद्देश्य से बनाया गया है — जिसमें हम हमले से पहले, दौरान और बाद की घटनाओं को विस्तार से बताते हैं। इसमें कुछ ऐतिहासिक तथ्य, जीवित बचे लोगों की कहानियाँ और दृश्य शामिल हो सकते हैं जो कुछ दर्शकों को विचलित कर सकते हैं। हमारा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है, बल्कि इतिहास के इस महत्वपूर्ण अध्याय से सीख लेना है। कृपया इस वीडियो को सावधानी और संवेदनशीलता के साथ देखें।

Hiroshima Nuclear Bomb: दुनिया का पहला परमाणु बम हमला कैसा था ?
Topics covered:
the Hiroshima bomb & dropping of first atomic bomb on Hiroshima.

31 Comments

  1. The Openehiemer ! He was shy in childhood, was bullied from his school colleague and neighbours but he was intelligent and from that trauma he started hating people and created this.

  2. मामा चा खरा चेहरा आज आपण पाहिला. माणूस कितीही कठोर असला तरी आपल्या अप्त्यासाठी एक सॉफ्ट कॉर्नर असतोच. हे सर्व मुलांनी आपल्या आई वडिलांसाठी लक्षात असू द्या, त्यांना आता नाही जेव्हा ते स्वतः पालक बनतात तेव्हा त्याच्या लक्षात येते.
    🙏👍